कुछ मन में तो है, मगर लिखूं कैसे... Kunal Prashant 02:59:00 0 कुछ मन में तो है, मगर लिखूं कैसे छुपाई हर पहर की चुभन, कहू कैसे। तुम गायब रहते हो किधर, उस पहर सारी बाते कर के मैं,ए मन तुम करते नहीं सहर... Read more »
दोस्तो के संग गुम हो जाता हूं मैं Kunal Prashant 20:57:00 0 परेशानियां तुम कहा गुम हो जाती हो मेरे यार मेरी मुस्कुराहट की वजह पूछा करते है अरे मेरे दर्द ए दिल तुम कहा चले जाते हो मेरे यार मुझस... Read more »
बड़ा तो हो रहा हूं पर.... Kunal Prashant 20:55:00 0 पांव जितने मजबूत होते जा रहे है उतना ही लड़खड़ाता जा रहा हूं हाथ सर से जितने दूर जा रहे है उतना ही बोझ में दबे जा रहा हूं घर की छत जि... Read more »
तन्हा हूं पर भीड़ में भी Kunal Prashant 20:52:00 0 तनहाई तो रहती थी पर इस कदर ! सबके साथ भी कुछ तन्हा तन्हा सा हूं यादे तो बहुतों के थे मगर इस क़दर ! ना जाने किस बात की चुभन में हूं ... Read more »
1st propose i suppose Kunal Prashant 20:49:00 0 हा वक़्त लगता है दबी बातो को जुबां पे लाना हड़बड़ नहीं फुरसत में सुनना तब ये दास्ताना बस अब और नहीं संभलेंगे मेरे ख्यालात बस अब कहना ही... Read more »
15 अगस्त ( स्वतंत्रता दिवस ) Kunal Prashant 20:21:00 0 बैठे बैठे थक गए है जनता हिंदुस्तान कि अख़बारों में लहरा रहा तिरंगा अपने मान की देख किताबो की गाथाएं में बाते बलिदान की बच्चे बच्चे पूछ ... Read more »
" पहली झलक के किस्से " Kunal Prashant 19:50:00 0 आंखे फकत ढूंढती रहती इश्क हर गलियारों में चार दिवारी घुट कर रहती बन्द एक आशियाने में मुस्कुराकर तालीम दे गई हरकते हमारी देख कर इश्क रश्... Read more »
एहतियात Kunal Prashant 11:17:00 राह पे बैठा पत्थर आवाज कर रहा है गुनगुना लफ्जो से झुटलाया न करो आसमान पैरों से लगी पड़ी है कलशन अदाओं से गिराया न करो वादिय... Read more »
" Annoying subjects " Helping Baba 15:22:00 First is math Giving me a lot of stress For all it is very easy But making me very busy.. Second is the chemistry Harder as the histo... Read more »
Aye zindagi tu hai kya tu ye bata.. Helping Baba 17:51:00 Aye zindagi tu hai kya tu ye bata.. Koi kehta hai tu ek natak hai.. Apna apna kirdaar nibha sab chle jayenge.. Agar tu natak hai to mujh... Read more »
मेरी मां तुम अनोखी हो Kunal Prashant 03:29:00 क्या केेह दू उसे वो इंतजार क्यू करती है थक हार चोखट पर क्यू रोज खड़े रहती है काम तो दिन का ख्तम हो ही जाता है फिर क्यों नहीं थोड़ा आराम ... Read more »
" मुझे क्यू खींचते हो अपने बीच " Kunal Prashant 03:27:00 खुदगर्ज पागल फरेब जो केह लो ईमान है मेरा , तुम भी समझ लो शर्म हया लाज़ की वो तुम्हारी बातें तुम ना ही करो ये छुप छुप बातें तुम हम... Read more »
” कौन है कवि '' Kunal Prashant 14:32:00 0 जो जीत ले हर दिल है वो कवि जो समेट ले हर ग़म वो है कवि जो कह कर अपनी दास्तां कर दे मग्न जिसे समझ ना पाओ देख आंखे नग्न जो भर दे हर चोट... Read more »
" न जाने कितनो का हाथ वही " Kunal Prashant 22:19:00 निर्मम सिमट सिकुड़ वो सोया था अंधेरे चौराहेे चौखट पे वो खोया था चादर ओढ़े सिर छुपाए, पांव फिर भी निकली थी सन सनाती हवा चली पैरो को छू, न... Read more »
Chaand ki chamak Kunal Prashant 13:57:00 0 Chaand ki chamak Aur tumhari mahak Ek si h Dono mujh tak to pahuch pati h Bass laut naa jaa paati h Aurrr tu ...mujhe Samajh hi nhi pa... Read more »