कुछ मन में तो है, मगर लिखूं कैसे... Kunal Prashant 02:59:00 0 कुछ मन में तो है, मगर लिखूं कैसे छुपाई हर पहर की चुभन, कहू कैसे। तुम गायब रहते हो किधर, उस पहर सारी बाते कर के मैं,ए मन तुम करते नहीं सहर... Read more »
दोस्तो के संग गुम हो जाता हूं मैं Kunal Prashant 20:57:00 0 परेशानियां तुम कहा गुम हो जाती हो मेरे यार मेरी मुस्कुराहट की वजह पूछा करते है अरे मेरे दर्द ए दिल तुम कहा चले जाते हो मेरे यार मुझस... Read more »
तन्हा हूं पर भीड़ में भी Kunal Prashant 20:52:00 0 तनहाई तो रहती थी पर इस कदर ! सबके साथ भी कुछ तन्हा तन्हा सा हूं यादे तो बहुतों के थे मगर इस क़दर ! ना जाने किस बात की चुभन में हूं ... Read more »